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कब्जा देने वालों के पास नहीं है मलकियत का कोई रिकार्ड: नफे सिंह राठी

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गुरुवार को एक प्रेसवार्ता में पूर्व विधायक नफे सिंह राठी ने तहसीलदार बहादुरगढ द्वारा करवाई गई पैमाईश की रिपोर्ट पत्रकारों के सामने प्रस्तुत की। जिसमें साफ तौर पर दर्शाया गया है कि निर्माण कार्य खसरा नंबर-2338-1 पर चल रहा है साथ ही नक्शे के अनुसार उसके साथ लगते खसरा नंबर-2337 जो नगर परिषद की मलकियत है पर भी दुकान बनाई जा चुकी है। रिपोर्ट आने के बाद भी निर्माण कार्य दिनरात जारी है जबकि रजिस्ट्री किसी अन्य खसरा नंबर की जमीन की करवाई गई है। जिसका खसरा नंबर अवैध निर्माण स्थल से मेल नही खाता है। इसलिए नगर परिषद ने उनके कुछ नक्शे तो रद्द कर दिए है और कुछ नक्शों की अनुमति वापिस ले ली।  इसके बावजूद भी इस अवैध निर्माण को रोकने के लिए कोई कार्यवाही नहीं हो रही है। अगर यही निर्माण किसी आम आदमी या किसी दुकानदार भाई का होता तो या तो उसे नगर परिषद द्वारा गिरा दिया जाता या गिराने का नोटिस दिया चुका होता। प्रशासन राजनीतिक दबाव से चुपचाप बैठकर अवैध निर्माण कराने में सहयोग कर रहा है। नफे सिंह राठी ने कहा कि अब तो पैमाईश की रिपोर्ट भी आ चुकी है और नक्शे भी रद्द हो चुके है अब सरकार के विधायक मौन क्यों है? क्योंकि क्योंकि मामला उनकी पार्टी द्वारा मनोनीत एक पार्षद के रिश्तेदारों का है  एवं स्थानीय विधायक द्वारा कुछ दिन पूर्व उक्त मनोनीत पार्षद को क्लीन चीट दी थी।  इसलिए विधायक को भी बहादुरगढ की जनता से माफी मंागनी चाहिए और इस अवैध निर्माण को रुकवाने के आदेश अधिकारियों को देने चाहिए, बजाय भू-माफियाओं को संरक्षण देने के।
अभी तक जितनी भी रिपोर्ट अधिकारियों ने हमें दी है उससे साफ जाहिर है कि भू-माफिया अवैध निर्माण करा रहे है और उन दुकानदारों को बरगलाने के लिए तितंबा रजिस्ट्रिया कराने की बात करते है। जो कि भ्रम फैलाने के अलावा और कुछ नहीं है। अशोक गुप्ता और उसका परिवार आज तक मिडिया या अधिकारियों को कोई भी पुख्ता सबूत नहीं दिखा पाए है। जिस 900 गज की रजिस्ट्री का वो जिक्र करते है उसमें कोई खसरा नंबर नहीं है इसलिए वो वैध कागजात नहीं माना जा सकता और जहां तक पीडब्ल्यूडी के तबादले का संबंध है जो खसरा नंबर-2338 से संबंधित है वह तबादला मालिक से ना होकर काश्तकार से किया गया है जो उसका मालिक नहीं था। इसलिए खसरा नंबर-2338 जो उस समय भी पीडब्ल्यूडी का था और 1956 के तबादले के बाद आज तक किसी भी जमाबंदी में भीम सिंह फतेह सिंह के नाम नहीं आया है और यदि पीडब्ल्यूडी के कागजों में कोई कमी है तो उसको तुरंत दुरुस्त किया जा सकता है। लेकिन खसरा नंबर-2337 व 2338 की मलकियत के उस मनोनीत पार्षद के किसी भी रिश्तेदार के नाम कोई भी लीगल कागज नहीं है और हमने इसी बारे में आवाज उठाई थी कि रजिस्ट्री कुंदन सिनेमा के खसरा नंबर-2331, 2335 व 2336 की करवाई गई है और कब्जा कबाडी बाजार रोड 2337 व 2338 पर दिया जा रहा है। इस रिपोर्ट से यह सौ प्रतिशत साबित हो चुका है। अगर सरकार ने इस अवैध निर्माण को रोकने का काम नहीं किया और बने हुए अवैध निर्माण को गिराने का काम नहीं किया तो अगले सप्ताह माननीय हाईकोर्ट में अपील दायर करके इस करोड रुपये की पब्लिक प्रोपर्टी को बचाने का काम किया जाएगा। इस मौके पर रामनिवास सैनी, सुखबीर राठी, सानू, महेंद्र सिंह राठी, रतन सिंह मोर, पप्पू कानोंदा, ईश्वर छिल्लर, रवि खत्री, देवेंद्र राठी, भूरा पहलवान, टीनू शर्मा, जगबीर, कुलदीप, कुलविंद्र सिंह, राज सिंह वर्मा आदि उपस्थित रहे।

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